'दिवाली' का त्योहार खुशियों का त्योहार है,क्या आप जानते है कि 'दिवाली' का अर्थ क्या होता है, दरअसल दिवाली' संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है और वो दो शब्द हैं 'दीप' अर्थात 'दीपक' और 'आवली' अर्थात 'लाइन' या 'श्रृंखला' जिसका मतलब हुआ 'दीपकों की श्रृंखला', दीपक को स्कन्द पुराण में सूर्य के हिस्सों का प्रतिनिधित्व करने वाला माना गया है। जैन धर्म के लोग इसे महावीर के 'मोक्ष दिवस' के रूप में मनाते हैं तथा सिख समुदाय इसे 'बंदी छोड़ दिवस' के रूप में मनाता है।

कई लोग दीपावली को 14 साल के वनवास पश्चात भगवान राम, मां सीता और उनके भाई लक्ष्मण की वापसी के सम्मान के रूप में मानते हैं।

दिवाली के दिन लक्ष्मी-गणेश पूजन किया जाता है। इस दिन लोग मां लक्ष्मी और गणेश जी का आशीष प्राप्त करने के लिए बहुत सारे टोटके भी अपनाते हैं, फिलहाल दिवाली के दिन आपको कुछ विशेष बातों का ख्याल रखने की जरूरत है।

आइए जानते हैं कि दिवाली के दिन क्या करें और क्या ना करें…

ये करें

दिवाली के दिन सुबह-सुबह उठकर नहा-धोकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
अगर संभव हो तो व्रत रखें और अपनी क्षमतानुसार मां लक्ष्मी और भगवान गणेश के लिए भोग-प्रसाद तैयार करें।
मां लक्ष्मी को खीर पसंद हैं तो वहीं गणेश जी को लड्डू का भोग लगता है।
प्रेम और श्रद्धा के साथ फिर पूजन करें।
गरीबों को दान दें।
बड़ों का आशीर्वाद लें।
मां लक्ष्मी को झाड़ू भी चढ़ाएं, वैसे भी इस बार दिवाली शनिवार को है, ऐसे में शनिवार के दिन झाड़ू खरीदने से मां लक्ष्मी के साथ ही शनिदेव भी प्रसन्न होंगे।
रात्रि जागरण करें।
किन्नरों को उपहार के साथ कुछ दक्षिणा अवश्य दें।
घर के मुख्य दरवाजे पर सिंदूर से शुभ-लाभ, श्री, स्वस्तिक और ओम के शुभ चिन्ह बनाएं।
सादगीपूर्ण ढंग से दीपावली का त्योहार मनाएं।
यह न करें

प्रदोष काल में झाड़ू न लगाएं।
नशा न करें।
जुआ न खेलें।
क्रोध न करें।
आंसू ना निकालें।
झगड़ा न करें।
देर तक न सोए।
सहवास ना करें।
काले कपड़े पहनकर पूजन न करें।
इन चीजों को घर से करें Bye-Bye

टूटे-फूटे फर्नीचर को घर से करें बाहर।
टूटा शीशा।
टूटे फोटो फ्रेम।
बंद पड़ी घड़ियों को भी घर से निकालें।
पुराने दीये ।