चिक्कमगलूरु जिला काफी के लिए ही मशहूर नहीं है। वह प्राकृतिक सौंदर्य को अपनी गोद में लिए पर्यटन केंद्र तथा धार्मिक केंद्रों के लिए भी जाना जाता है। देश-विदेश से हजारों पर्यटक हस मौसम में यहां के प्राकृतिक सौंदर्य को निहारने आते हैं। कोविड-19 के चलते मुरझाए पर्यटन उद्योग में फिर जान आने लगी है।
राज्य तथा जिले में कोरोना संक्रमण पाए जाते ही मई में पर्यटन स्थलों के दौरे पर प्रतिबंध लगाया गया था। मुल्लय्यनगिरी, बाबा बुडनगिरी दत्तपीठ, केम्मणगुंडी पहाड़ी इलाका (हिल स्टेशन), कल्लतगिरी जल प्रपात, हेब्बे जलप्रपात, धार्मिक क्षेत्र शृंगेरी शारदांबे मंदिर, होरनाडु अन्नपूर्णेश्वरी मंदिर तथा कलशेश्वर मंदिरों में श्रध्दालुओं तथा पर्यटन स्थलों में पर्यटकों के नहीं होने से बेरंग हो गया था। पर्यटन स्थलों पर लगाए गए प्रतिबंध को अगस्त माह में हटाने के बाद बेरंग पर्यटन स्थलों पर रौनक लौट आई है।
शृंगेरी मंदिर में अगस्त में देश तथा विदेश की विभिन्न जगहों से 65 हजार 100 से अधिक श्रध्दालुओं ने दौरा किया था। होरनाडु अन्नपूर्णेश्वरी मंदिर को 50 हजार 45 से अधिक लोगों ने दौरा किया। कलशेश्वर मंदिर का दो हजार एक सौ, चिक्कमगलूरु शहर के लिए तीन हजार 243 से अधिक लोगों ने दौरा किया। इसके चलते एक लाख 20 हजार 488 से अधिक लोगों ने जिले का दौरा किया है। सितम्बर में शृंगेरी मंदिर के लिए देश तथा राज्य के विभिन्न भाग से 84 हजार 300 से अधिक लोग, होरनाडु अन्नपूर्णेश्वरी मंदिर को 68 हजार 530, कलशेश्वर मंदिर के लिए 15 हजार, बाबा बुडनगिरी दत्तपीठ तथा मुल्लय्यनगिरी क्षेत्र को 15 हजार तीन सौ से अधिक लोग, चिक्कमगलूरु शहर के लिए चार हजार 272 से अधिक लोग, केम्मणगुंडी हिल्स स्टेशन के लिए सात हजार 542 से अधिक पर्यटन समेत एक लाख 94 हजार 944 से अधिक पर्यटकों ने दौरा किया है। दिन ब दिन जिले के पर्यटन स्थलों का दौरा करने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है। इससे बेरंग हुए पर्यटन केंद्रों की फिर से रंगत लौट रही है।

व्यापार- उद्योग को लगे पंख
कोविड-19 के चलते पर्यटन स्थलों पर लगाए गए प्रतिबंध से पर्यटन स्थलों में स्थित व्यापार, कारोबार, वाणिज्य उद्योग बंद थे। इसी पर निर्भर रहकर जीवन गुजार रहे हजारों परिवार आर्थिक मार से चरमरा गए थे। फिलहाल अगस्त के बाद कोविड-19 के दिशा निर्देशों पर अमल के साथ पर्यटन स्थलों के दौरे के लिए जिला प्रशासन ने मौका दिया है। फिलहाल पर्यटन उद्योग संभलने के साथ व्यापार-कारोबार के पंख लग गए हैं। इसी पर निर्भर होकर जीवन गुजार रहे परिवार आर्थिक तौर पर धीरे से उभर रहे हैं। होम स्टे, रेसार्ट, लॉज में व्यापार-कारोबार में सुधार नजर आ रहा है।

सप्ताह अंत में पर्यटकों का सैलाब
प्रतिदिन जिले के प्राकृतिक स्थलों के सौंदर्य को निहारने के लिए राज्य के विभिन्न भागों से हजारों लोग आते हैं। इसमें भी सप्ताह अंत शनिवार तथा रविवार जिले के प्रसिध्द पर्यटन स्थलों के लिए पर्यटकों का सैलाब उमड़ रहा है।

उबर रहा पर्यटन उद्योग
जिले में पर्यटन उद्योग उभर रहा है। पर्यटन उद्योग पर निर्भर व्यापार-कारोबार, आवास, होटल, लॉज उद्योग में सुधार नजर आ रहा है। उमेश, अधिकारी, पर्यटन उद्योग विभाग

कोरोना फैलने का खौफ
चिक्कमगलूरु का सौंदर्य ही जिले की जनता के लिए क्या खतरा बना है यह सवाल लोग करने लगे हैं। शनिवार तथा रविवार को पर्यटक मौज-मस्ती, आनंद का मजा उठाने का दिन होता है परन्तु जिले की जनता के लिए मात्र खौफ का दिन है। राज्य के बेहद ऊंची पहाड़ी के तौर पर जाने जाने वाले मुल्लय्यन गिरी में सतर्कता कार्रवाई नहीं अपनाने वाले पर्यटकों की मौज-मस्ती से स्थानीय लोगों में कोरोना फैलने का खौफ छाया है। सप्ताहांत में जिले को राज्य के कोने-कोने से हजारों से पर्यटक आते हैं। आने वाले पर्यटक चेहरे पर मास्क नहीं पहन रहे हैं। वहीं सामाजिक दूरी के नियमों का पालन भी नहीं कर रहे हैं। लापरवाह पर्यटकों से स्थानीय निवासियों तथा अन्य पर्यटकों में खौफ छाया है। कुछ पर्यटकों में एक सिम्टम का कोरोना रहता है। ऐसे लोग देखने में स्वस्थ नजर आते हैं। कोरोना के कोई भी लक्षण नहीं होते। उनसे भी कोरोना फैल सकता है कह कर सरकार ने मास्क पहनने, सामाजिक दूरी बनाए रखने को लेकर जागरुकता पहुंचा रही है परन्तु चिक्कमगलूरु आ रहे गैरजिम्मेदार, लापरवाह पर्यटक सरकार के निर्देश हनारे लिए नहीं हैं ऐसा बर्ताव कर रहे हैं। सरकार कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए संघर्ष कर रही है जूझ रही है। वहीं दूसरी ओर पर्यटन स्थलों में सरकार ने अधिकारियों को नियुक्त नहीं किया है। पुलिस नहीं है। ग्राम पंचायत ने भी किसी को नियुक्त नहीं किया है। इसके चलते पर्यटक मनमानी कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने अधिकारियों को नियुक्त करने, मास्क नहीं पहनने वाले, सामाजिक दूरी नहीं बनाए रखने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग कर रहे हैं।