नई दिल्ली । पश्चिम बंगाल में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी उठा-पटक चरम पर है। अमित शाह एक बार फिर बंगाल का दौरा करने वाले हैं। शाह के 30 को होने वाले दौरे से पहले ममता बनर्जी को एक और झटका लगा है, जब राज्य सरकार में मंत्री राजीब बनर्जी ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।माना जा रहा है कि शाह के दौरे के दौरान कई और टीएमसी नेता भाजपा का दामन थाम सकते हैं। 
राजीब बनर्जी के इस्तीफे को शाह के दौरे से जोड़कर देखा जा रहा है। राजीव बनर्जी के मंत्री पद से इस्तीफे के बाद अटकलों का बाजार गर्म हो गया है। अमित शाह के दौरे से इस इस्तीफे को इसलिए भी जोड़कर देखा जा रहा है क्योंकि जब पिछले माह अमित शाह दौरा करने वाले थे, तो उससे ठीक पहले ममता बनर्जी की टीएमसी में सियासी भगदड़ देखने को मिली थी और शुभेंदु अधिकारी के बाद एक-एक कर लगबग दस टीएमसी नेता और विधायक भाजपा में आ गए थे। 
गौरतलब है कि भाजपा ने पश्चिम बंगाल में दो सौ पार का नारा दिया है। भाजपा ने पिछले चुनाव में महज तीन सीटें जीती थी, लेकिन लोकसभा चुनाव में उसने 18 सीटें जीतकर बड़ी छलांग लगाई, जिसके बाद वह राज्य में सत्ता की मजबूत दावेदार बनकर उभरी है। यही वजह है कि अमित शाह जब-जब बंगाल का दौरा करते हैं, ममता बनर्जी की धड़कनें बढ़ जाती हैं। इसकी मिसाल पिछली बार टीएमसी समेत सभी देख चुके हैं कि कैसे बंगाल दौरे पर अमित शाह ने टीएमसी के कुनबे से कई नेतओं को अपनी पार्टी में शामिल करा लिया था। 
पिछली बार गृहमंत्री अमित शाह के दो दिवसीय दौरे के दौरान ममता के संकटमोचक माने जाने वाले शुभेंदु अधिकारी, जितेंद्र तिवारी, शीलभद्र दत्ता समेत कई नेता भाजपा में शामिल हुए थे। इससे पहले दिसंबर से पहले नवंबर में कूचबिहार दक्षिण सीट से तृणमूल कांग्रेस विधायक मिहिर गोस्वामी ने पार्टी से इस्तीफा देते हुए दिल्ली में भाजपा का दामन थाम लिया था। कहा जा रहा है कि भाजपा टीएमसी में बड़ी सेंध लगाने की तैयारी में है। भाजपा का दावा है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के कई विधायक उसके संपर्क में है, लेकिन वह किसी जल्दबाजी में नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 23 जनवरी व गृह मंत्री अमित शाह के 30 जनवरी के दौरों के से भाजपा के मिशन को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।