नई दिल्ली । संविधान दिवस के मौके पर सरदार पटेल की विशालकाय प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और नर्मदा के तट पर आयोजित हो रहा 80वां पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन शताब्दी वर्ष होने की वजह से ऐतिहासिक होगा। पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन की परंपरा 1921 मे शुरू हुई थी। इसलिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने शताब्दी वर्ष के इस आयोजन को ऐतिहासिक बताया है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद इसका उद्घाटन करेंगे। अगले दिन 26 तारीख को संविधान दिवस पर समापन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा, केवड़िया की धरती स्वंत्रता आंदोलन के प्रणेता महात्मा गांधी की धरती है। सरदार वल्लभ भाई पटेल की भी धरती है, जिन्होंने देश का एकीकरण किया। यह नर्मदा का तट भी है और यहां सरदार पटेल की विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा है। कई बार स्थान का महत्व भी होता है। इसलिए तय किया गया कि संविधान दिवस केवड़िया में मनाया जाए। उन्होंने कहा, 1921 से पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन की परम्परा चल रही है। यह शताब्दी वर्ष है। इसलिए ये कार्यक्रम काफी अनूठा है। बिड़ला ने बताया कि सम्मेलन का उद्घाटन भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद दिनांक 25 नवम्बर 2020 को प्रातः 11 बजे करेंगे। कार्यक्रम में भारत के उपराष्ट्रपति तथा राज्य सभा के सभापति एम. वेंकैया नायडु जी भी उपस्थित रहेंगे। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी सम्मेलन में शिरकत करेंगे। सम्मेलन में देश की सभी विधान सभाओं और विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारियों को आमंत्रित किया गया है। 27 विधान सभाओं व विधान परिषदों के पीठासीन अधिकारियों की सम्मेलन में भाग लेने की पुष्टि हो चुकी है। सम्मेलन में सभी राज्यों के विधानमंडलों के सचिवों तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के भी शामिल होने की सम्भावना है। बिड़ला ने कहा कि 26 नवंबर का दिन भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का महत्वपूर्ण दिन है क्योंकि यह दिन संविधान दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष को पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन के शताब्दी वर्ष के रूप में भी मनाया जा रहा है। पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन लोकतांत्रिक प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने के लिए नए अनुभवों और विचारों को साझा करने के लिए एक उपयुक्त मंच सिद्ध हुआ है। इस वर्ष के सम्मेलन के विषय - विधायिका, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के मध्य सामंजस्यपूर्ण समन्वय  एक जीवंत लोकतंत्र का मार्ग - का उल्लेख करते हुए बिड़ला ने कहा कि विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारी भारत के लोकतंत्र को सुदृढ़ और अधिक प्रभावी बनाने के लिए लोकतंत्र के तीन महत्वपूर्ण स्तंभों के बीच बेहतर सहयोग और समन्वय की आवश्यकता पर विचार विमर्श करेंगे। लोकसभा अध्यक्ष ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करेंगे। बिड़ला ने यह बताया कि 71 वें संविधान दिवस के अवसर पर पीठासीन अधिकारी विधानमंडलों को और अधिक जवाबदेह बनाने की शपथ लेंगे, जिससे संवैधानिक मूल्यों के अनुसार उन्हें सुदृढ़ और सशक्त बनाने में सहायता मिलेगी। इसके अतिरिक्त, सम्मेलन में आए शिष्टमंडल के सभी सदस्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में भारतीय संविधान की प्रस्तावना को भी पढ़ेंगे। बिड़ला ने कहा कि हमारा संविधान हमारे लोकतंत्र को सुदृढ़ करता है और इसके जरिए संसदीय लोकतंत्र में लोगों की आस्था को मजबूती प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि विधानमंडल आम जनता को प्रभावित करने वाले मुद्दों को उठाने के लिए सर्वोच्च मंच है। इस रूप में जनप्रतिनिधियों की अपने-अपने सदनों में जनता की भावनाओं को व्यक्त करने की महती जिम्मेदारी होती है। लोकसभा अध्यक्ष ने इस बात पर जोर दिया कि विधानमंडलों में होने वाली चर्चाएं लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाती हैं और इस कारण यह आवश्यक हो जाता है कि सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से बिना किसी व्यवधान के चलती रहे। सम्मेलन का समापन संविधान के प्रति आस्था जताने वाली एक घोषणा व संकल्प के साथ होगा।