पटना।बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में कांग्रेस की सीटें घटी, तो सभी वर्ग से जीतने वालों की संख्या भी कम हो गई। यानी कांग्रेस के विधायकों की सामाजिक संरचना भी कमोबेश पिछले चुनाव वाली ही रह गई है। लेकिन, वर्ष 2000 के चुनाव से तुलना करें तो कांग्रेस की सीटें कम होने से सबसे अधिक नुकसान सवर्ण, दलित व अल्सख्यंकों को हुआ है। इसको दूसरे रूप में कहें तो सवर्णों का झुकाव जैसे-जैसे भाजपा की ओर होता गया कांग्रेस की सीटें घटती गई। सवर्ण, दलित और मुसलमान ही इस पार्टी के शुरू से आधार वोट रहे हैं। गत चुनाव में भी सवर्णो की बल्ले-बल्ले थी। इस बार भी ऐसा ही हुआ है। लेकिन, पिछली बार की तुलना में इनकी संख्या 12 से घटकर आठ पर पहुंच गई। दलित, पिछड़े और अल्पसंख्यकों की संख्या भी इसी अनुपात में कम हुई है। इस चुनाव में कांग्रेस मात्र 19 सीटें ही जीत सकी है। पिछली बार 27 सीटें पार्टी जीती थी। इस बार जीतने वालों में सबसे अधिक ब्रह्मर्षि समाज और ब्रह्मण जाति के तीन-तीन उम्मीदवार हैं। क्षत्रिय वर्ग के भी दो उम्मीदवार जीत हासिल किये हैं। पिछड़े समाज के दो उम्मीदवार चुनाव जीते हैं। इसमें एक यादव जाति के और दूसरे वैश्य समाज से आते हैं। दलितों की संख्या भी इस बार चार है, जो पिछली बार पांच थी। इसी तरह चार अल्पसंख्यक उम्मीदवारों ने इस बार जीत हासिल की है। पिछली बार इनकी संख्या पांच थी। जनजाति वर्ग के एक उम्मीदवार तब भी चुनाव जीते थे और इसबार भी उन्हें क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला है। इसके पहले के चुनावों पर नजर डालें तो सबसे अधिक सीट कांग्रेस को वर्ष 2000 के चुनाव में मिली थी। उस समय संयुक्त बिहार में पार्टी के 23 उम्मीदवार जीते थे लेकिन बंटवारे के बाद मात्र 12 विधायक ही रह गये। इनमें भी सबसे अधिक तीन भूमिहार जाति के और एक ब्रह्मण के थे। मुस्लिम समाज के पांच, दलित के दो और एक पिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार को प्रतिनिधित्व मिला था। इसके पहले वर्ष 2005 के चुनाव में कांग्रेस के नौ विधायक जीते थे। उसमें सवर्णों की संख्या मात्र दो थी। एक भूमिहार और एक राजपूत। लेकिन मुस्लिमों की संख्या तब भी चार थी और दलितों की संख्या दो। एक पिछड़े वर्ग के उम्मीदवार भी चुनाव जीते थे। 2010 के चुनाव में मात्र चार उम्मीदवार ही जीते थे और उस समय तीन मुसलमान और एकमात्र पिछड़ी जाति के उम्मीदवार को जीत मिली थी।  कुल मिलाकर देखें तो कांग्रेस की जीत हार का अंतर उसके सामाजिक समीकरण के औसत पर नहीं पड़ा है। लेकिन उम्मीदवारों की संख्या को लेकर इसकी तुलना करेंगे तो सवर्णों और दलित उम्मीदवारों की जीत प्रतिशत पिछले चुनाव जैसा ही है। 

कांग्रेस के जीते हुए उम्मीदवार चुनाव 2020
राजपूत दो, भूमिहार तीन , ब्रह्मण तीन , दलित -चार , यादव एक , वैश्य एक,  मुस्लिम चार और जनजाति एक

2015 का चुनाव
राजपूत तीन, भूमिहार चार, ब्रह्मण चार, कायस्थ एक, दलित पांच , मुस्लिम छह, कुर्मी एक, यादव दो, जनजाति एक 

2010 का चुनाव
तीन मुसलमान और एक पिछड़ी जाति 

2005 का चुनाव
चार मुस्लिम, दो दलित, दो सवर्ण, एक पिछड़ा

2000 का चुनाव
पांच मुस्लिम, चार सवर्ण, दो दलित अरौर एक पिछड़ा