चंबल नदी से 2 किलोमीटर दूर उत्तरी किनारे पर स्थित अटेर किले को पुराने स्वरूप में लाने के लिए भारतीय पुरातत्व विभाग ने सात साल पहले जीर्णोद्धार शुरू कराया था। इस दौरान किले के जीर्णोद्धार के काम में उड़द की दाल, गोंद, सफेद सीमेंट, बजरी के पेस्ट से एक-एक ईंट को जोड़ा गया था। दो साल काम करने के बाद बजट नहीं हाेने से ठेकेदार ने काम बंद कर दिया। जिसके कारण पिछले चार साल से जीर्णोद्धार का काम रुका हुआ है।

किले का निर्माण कार्य सन 1644 में भदौरिया शासक राजा बदन सिंह ने प्रारंभ कराया था। सन1668 में महासिंह भदौरिया के कार्यकाल में इसका निर्माण पूरा हुआ। किला पूर्व से पश्चिम तक 700फीट एवं उत्तर से दक्षिण तक 325 फीट है। इसमें 17बुर्ज और चार प्रवेश द्वार हैं। महाभारत में जिस देवगिरी पहाड़ी का उल्लेख आता है। यह किला उसी पहाड़ी पर बना हुआ है।

देश में पुरातत्व संपदाओं का काम बजट के हिसाब से चलता है, जैसे-जैसे बजट आता है। उसी आधार पर जीर्णोद्धार का काम होता है। बजट आने पर अटेर दुर्ग का काम फिर से शुरू कर दिया जाएगा।