करांची । पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति और तानाशाह के रूप कुख्यात रहे परवेज मुशर्रफ इन दिनों गंभीर रूप से बीमार चल रहे हैं उनकी एक ताजा तस्वीर सामने आई हैं और इस तस्वीर को देखते ही पाकिस्तानियों की भावनाएं बेकाबू हो गई हैं। इस तस्वीर में मुशर्रफ बीमार हालत में दिख रहे हैं और काफी कमजोर लग रहे हैं। कोई पूर्व तानाशाह को लेकर अपना गुस्सा जाहिर कर रहा है, तो कोई उनके साथ अपनी हमदर्दी जता रहा है। बहरहाल फोटो को शेयर करते हुए ऑल पार्टीज मुस्लिम लीग ने मुशर्रफ के जल्द बेहतर होने की दुआ की। पाकिस्तान की मुशर्रफ सरकार में मंत्री रहे चौधरी फवाद हुसैन ने तस्वीर शेयर करते हुए लिखा, 'आपकी अच्छी सेहत के लिए कामना राष्ट्रपति महोदय। आपको मुस्कुराते देखकर अच्छा लगा। आपने पूरी जिंदगी पाकिस्तान के लिए लड़ाई लड़ी है। आपके लिए प्रार्थना और शुभकामनाएं।'
हालांकि पाकिस्तान की आम जनता ने चौधरी फवाद हुसैन की तरह प्रतिक्रिया नहीं दी। सैयद फैसल नाम के एक यूजर ने लिखा, 'पाकिस्तान के लिए लड़ाई लड़ी? विदेशी ताकतों को अपनी जमीन पर बम गिराने और महिलाओं सहित अपने नागरिकों का अपहरण करने का न्यौता देकर। कौन सा सैनिक विदेशी ताकतों को अपनी जमीन और नागरिकों पर ऐसा करने का न्यौता देता है। सिर्फ एक गद्दार ही ऐसा कर सकता है। 'एक यूजर ने लिखा कि याद रखना पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश को टॉर्चर करने के लिए मुशर्रफ ने अपने गुंडे भेजे थे। इस बात को याद रखना। एक यूजर ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री इमरान खान ने आरोप लगाया था कि मुशर्रफ ने मुताहिदा कौमी आंदोलन के साथ मिलकर कराची में 48 लोगों की हत्या की साजिश रची थी। कई लोगों ने मुशर्रफ पर पाकिस्तान को अमेरिका के हाथों डॉलर में बेचने का आरोप भी लगाया।  
हालांकि कुछ लोगों ने मुशर्रफ की तारीफ भी की और उनके प्रति हमदर्दी जताई। फरोजान बोखारी नाम की एक यूजर ने लिखा कि सबसे ज्यादा सम्मानित राष्ट्रपति मुशर्रफ को सलाम! एके खान ने लिखा कि एक राष्ट्र के तौर पर हमें शर्म आनी चाहिए जिस तरह हम अपने असली नायकों के साथ व्यवहार करते हैं। मुशर्रफ को पाकिस्तान लौटने देना चाहिए और बाकी की जिंदगी अपने मुल्क में गुजारनी चाहिए। नरक मिले उन लोगों को जो इस महान आदमी से नफरत करते हैं। बता दें कि पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुशर्रफ ने साल 2001 से 2008 तक राष्ट्रपति की कुर्सी संभाली। 1999 में तख्तापलट के बाद वह देश के 10वें राष्ट्रपति बने थे। महाभियोग से बचने के लिए उन्होंने 2008 में इस्तीफा दे दिया था। 17 दिसंबर 2019 को एक स्पेशल बेंच ने मुशर्रफ को राजद्रोह के केस में मौत की सजा सुनाई थी। पीएमएल-एन सरकार ने साल 2007 में गैर-संवैधानिक इमरजेंसी लगाने के फैसले पर मुशर्रफ के खिलाफ राजद्रोह का केस फाइल किया था।