पटना। बिहार का सीमांचल वह इलाका कहलाता है जो नेपाल और पश्चिम बंगाल की सीमा से लगता हुआ पूर्वोत्तर भारत से जुड़ता है। सियासी समीकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि यहां के चार जिलों-  पूर्णिया में 35 फीसदी, कटिहार में 45 फीसदी, अररिया में 51 फीसदी और किशनगंज में 70 फीसदी मुस्लिम वोट हैं। अब जो चुनाव परिणाम/रुझान सामने आ रहे हैं इसके अनुसार सीमांचल की 24 सीटों में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने महागठबंधन का खेल बिगाड़ दिया है और 24 सीटों में महज 5 पर महागठबंधन आगे है, जबकि 11 पर एनडीए को बढ़त है। इसके अलावा आठ सीटों पर अन्य को मिल रही हैं, जिनमें से ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम तीन सीटों पर आगे है।
  रुझानों के अनुसार वैसे तो यहां मुकाबला एनडीए और महागठबंधन के बीच ही देखने को मिल रहा है, लेकिन मैदान में ओवैसी फैक्टर एनडीए के पक्ष में काम करता दिख रहा है। ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम भी महागठबंधन और एनडीए को चुनौती दे रही है। पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें तो सीमांचल की 19 में से 12 सीटें आरजेडी और कांग्रेस ने जीती थीं। खबर लिखे जाने तक ओवैसी की पार्टी अमौर और कोचाधामन सीट पर आगे चल रही है। सीमांचल इलाके की 24 सीटों में से महागठबंधन की ओर से आरजेडी 11, कांग्रेस 11, भाकपा-माले 1 और सीपीएम 1 सीट पर चुनाव लड़ रही है। वहीं, एनडीए की ओर से बीजेपी 12, जेडीयू 11 और हम एक सीट पर चुनावी किस्मत आजमा रही है। गौरतलब है कि सीमांचल इलाके में 2015 के चुनाव में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। कांग्रेस ने यहां अकेले 9 सीटों पर जीत दर्ज की थी जबकि जेडीयू को 6 और आरजेडी को 3 सीटें मिली थीं।