नई दिल्ली । देशभर में 40 दिन तक अमेज़न स‎हित सभी ई-कॉमर्स पोर्टल का विरोध ‎किया जाएगा। देशभर के कारोबारियों के सबसे बड़े संगठन कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने यह घोषणा की है। कैट का आरोप है कि ई-कॉमर्स कंपनियां अपनी मनमानी करने के साथ ही एफडीआई  (एफडीआई) पॉलिसी का उल्लंघन कर रही हैं। इसी के खिलाफ देशभर में 20 नवंबर से 31 दिसंबर तक 40 दिन के आंदोलन का ऐलान कर दिया गया है1 कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बीसी भरतिया और राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल ने नई दिल्ली में आंदोलन की घोषणा करते हुए कहा की इस आंदोलन का उद्देश्य उन ई-कॉमर्स कंपनियों को बेनकाब करना है जो सरकार की नीतियों की धज्जियां उड़ा रहे हैं, देश के रिटेल व्यापार पर कब्ज़ा करने के मंसूबे पाले हुए हैं। कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल का कहना है कि आंदोलन के दौरान हमारी कुछ मांगे भी हैं। जैसे केंद्र सरकार ई-कॉमर्स पालिसी की तुरंत घोषणा करे, ई-कॉमर्स रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन करे, एफडीआई पॉलिसी के प्रेस नोट 2 की खामियों को दूर कर एक नया प्रेस नोट जारी करे। वहीं केंद्र सरकार के साथ ही सभी राज्य सरकार इन कंपनियों को अपने राज्य में माल बेचे जाने से रोकें।
उन्होंने यह भी कहा कि अनेक बैंक भी इनके पोर्टल पर खरीद करने पर कई तरह के कैश बैक और डिस्काउंट देकर इन कंपनियों के साथ अनैतिक गठबंधन में शरीक हैं। यही नहीं बड़ी मात्रा में देश का डाटा इन कंपनियों को एक योजनाबाद तरीके से लीक किया जा रहा है। जैसे कि यदि किसी सरकारी योजना से कोई चीज़ बुक कराई जाती है तो तुरंत उस व्यक्ति के पास इन कंपनियों का मैसेज पहुंच जाता है, जिससे साफ़ है कि भारत के रिटेल बाजार को कब्ज़ा करने का एक सोचा समझा षड्यंत्र चल रहा है। उनका कहना है कि बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों ने लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना, गहरे डिस्काउंट देना, सामान की इन्वेंट्री पर अपना नियंत्रण रखना, बड़े ब्रांड वाली कंपनियों से साठ-गांठ कर उनके प्रोडक्ट केवल अपने पोर्टलों पर ही बेचने जैसी व्यापारिक तिकड़म से छोटे व्यापारियों का व्यापार बुरी तरह तबाह कर दिया है। उनका यह भी कहना है कि देश के 7 करोड़ छोटे-बड़े व्यापार से 40 करोड़ लोगों रोजगार मिलता है, जिसे इस तरह से उपेक्षित नहीं किया जा सकता है।