भोपाल । प्रदेश में हो रहे उपचुनाव में भले ही मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच है, लेकिन भाजपाईयों के निशाने पर केवल पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा जहां भी सभा कर रहे हैं कमलनाथ ही उनके निशाने पर रहते हैं। खंडवा लोकसभा उपचुनाव में मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान की पहली सभा शनिवार को बुरहानपुर विधानसभा के फोपनार में हुई। 20 मिनट के भाषण में भाजपा प्रत्याशी ज्ञानेश्वर पाटिल के लिए वोट मांगने से ज्यादा कमलनाथ को याद किया। बार-बार उनका नाम लेकर निशाना साधते रहे। इसकी वजह यह है कि भाजपा में उम्मीदवारों के नए चेहरे चुनौती बने हुए हैं। खंडवा मेें भाजपा का 25 साल बाद प्रत्याशी का चेहरा बदला हंैं। कांग्रेस प्रदेश के अध्यक्ष कमलनाथ की खंडवा में एक सभा हो चुकी है। अब 18 को धूलकोट में सभा होने जा रही है। अब तक बुरहानपुर में कांग्रेस से पूर्व सांसद अरुण यादव, पूर्व कैबिनेट मंत्री सचिन यादव सहित कई नेता आ चुके हैं। जबकि भाजपा से प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा और मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान सभा ले चुके हैं।

 सामान्य सीटों पर भाजपा का ओबीसी दांव
एक लोकसभा सीट और तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के नतीजों से शिवराज सरकार की सेहत पर तो कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन ये चुनाव सरकार के कामकाज को लेकर जनता के मूड का आईना जरूर होंगे। इस चुनावी दंगल में दिलचस्पी का विषय यही है कि राज्य के दो मुख्य प्रतिद्वंद्वी भाजपा और कांग्रेस अपनी सीटें बचाने और दूसरे की सीट छीनने में कितने कामयाब हो पाते हैं। ये उपचुनाव खंडवा लोकसभा सीट तथा रैगांव, पृथ्वीपुर एवं जोबट विधानसभा सीट पर हो रहे हैं। इस बार भाजपा ने सामान्य सीटों पर ओबीसी कार्ड खेला है, जो पार्टी की पिछड़ा वर्ग केंद्रित रणनीति का प्री-टेस्ट भी होगा।

किसानों की नाराजगी पड़ेगी भारी
जहां तक चुनावी मुद्दों की बात है तो स्थानीय मुद्दे और जातिगत समीकरण ही इन चुनावों में निर्णायक होंगे। हालांकि आसन्न बिजली संकट और प्रदेश में उर्वरक वितरण में व्यवस्था जल्द न सुधरी तो किसानों की नाराजी सत्तारूढ़ भाजपा को महंगी पड़ सकती है।  इसके अलावा जोबट और पृथ्वीपुर में दलबदलू को टिकट देना भाजपा के लिए सिरदर्द साबित हो सकता है। कांग्रेस इन उपचुनावों को राज्य में 2023 में होने वाले विधानसभा चुनावों का सेमीफाइनल मान रही है, जबकि भाजपा उपचुनाव के नतीजों को शिवराज सरकार के कामकाज पर जनता की मोहर के रूप में देखेगी। लिहाजा दोनों पार्टियों ने पूरी ताकत झोंक दी है।